Sunday, March 29, 2009

गुलजार के नाम


पिछले कुछ सालो मे ज़िंदगी इतनी व्यस्त हो गई की मुझे खुद के लिए भी समय नही मिल पाया और शायर पीयूष कहाँ लापता हुआ कोई नही जनता. पर अब में एक नई शुरुआत कर रहा हू इस ब्लॉग के साथ. ये ब्लॉग गुलज़ार के नाम है जो मेरे पसंदीदा शायर है. गुलज़ार सबसे अलग है, उन्होने ही उर्दू मे छायावाद का प्रयोग किया है, मौसम मैं रानाईयाँ और खुश्बुओ को देखना उन्ही के बस की बात है. संपूर्ण सिंघ याने की गुलज़ार मूलत पंजाबी है पर उनकी शायरी लाज़वाब है. "आदतन तुमने कर दिए वादे, आदतन हमने एतबार किया," "तेरी राहों में बरहा रुक कर, हमने अपना ही इंतज़ार किया."

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