Sunday, March 29, 2009

एक ख़्याल


"सबकी तहज़ीब कहाँ एक सी होती है,
कभी क्या ज़ुस्तज़ु भी रकीब होती है,"

"गर खुदा रोक दे बारिशें तो बता दूं सबको,
सूरज के साथ नही परछाईयाँ होती हैं,"

"उन अनकहे लम्हों को अब करीब नही रखता,
जानता हूँ नही उम्र भर ये रानाईयाँ होती हैं,"

"कुछ और थी बात उनकी जिन्हें मैं कहता था गुलमोहर,
कोन जाने क्या अब भी उनके साथ वही तनहाईयाँ होती हैं."

"की थी एक दुआ की जो चाहे वो मिले उनको,
मेरी सदाओं मे नही मेरी ज़िंदगी की तरह वीरानियाँ होती हैं."

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